अभी तक इस ब्लॉग को देखने वालों की संख्या: इनमे से एक आप हैं। धन्यवाद आपका।

यह ब्लॉग खोजें

गुरुवार, 17 नवंबर 2016

काश!!!

काश!!! दूसरों की बेमानी पर, 
हम जान कर अन्जान न होते।
माना कि सब ईमानदार नहीं हैं,
पर अगर ये कुछ बेईमान न होते,
तो हम यूँ कतारों में लगे लगे,
हैरान न होते,यूँ परेशान न होते।

काश!!! दूसरों की बेमानी पर, 
हम जान कर अन्जान न होते।

कोई टिप्पणी नहीं: