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रविवार, 15 मई 2016

एक उलझन



दोस्तों एक उलझन है, बड़ी दुविधा में हूँ आजकल। असल में मैं और मेरी पत्नी स्वाती दोनों ही चिंतित हैं, मदद करें।
 
बात ये है कि मेरा पुत्र आरुष अब स्कूल जाने लगा है और मैं और स्वाती आजकल लिस्ट बनाने लगे हैं कि उसे क्या क्या करना चाहिए, उसे' बड़ा होकर क्या बनाएं? क्या बनायें उसे जिससे समाज में हमारी नाक ऊँची हो। भट्टों, खत्रिओं, पटवालों ,शर्मों और वर्मों के बच्चों को पछाड़ दे, हमेशा सबसे आगे रहे। सोसाइटी में हमारा नाम ऊंचा करे। मैं उसे हमारे खानदान का पहला डॉक्टर बनवाना चाहता हूँ। और स्वाति उसे आईएएस
वैसे IIT का भी एक ऑप्शन ओपन रखा है। पढ़ाई के साथ साथ उसे गाना, नाचना और खाना बनाना भी आना चाहिये।
खेल में भी उसे अव्वल आना होगा। क्रिकेट में सचिन, शतरंज में आनंद और टेनिस में पेस, "कुश्ती और बॉक्सिंग भी अच्छा ऑप्शन है बट "वो हाई सोसाइटी गेम्स नहीं हैं "। अभी तीन साल का है और सोच रहा हूँ उसकी प्रीनर्सरी के बाद उसे हॉबी सेंटर्स में भेजूँ और ट्युसन लगा दूँ। आखिर हमारी भी कुछ इच्छाएँ हैं, हम इतना सब किसके लिए करते हैं? अपने बच्चों के लिए ही तो। बदले में बस सिर्फ ये ही तो मांगते हैं कि वो कुछ अच्छा करें।  आखिर उनके भले के लिए ही तो हम ये सब सोचते हैं।
क्या कहा??? सौदा ??? न न न ये कोई सौदा थोड़े न है, माँ बाप का प्यार तो बिना मतलब का होता है, माँ पर बाप पर कवितायें नहीं पढ़ते क्या? इतना कुछ करते हैं उनके लिए,  बदले में अपने अधूरे सपने ही तो पूरा करने को कहते हैं, कौनसा पूरी ज़िन्दगी मांग रहे हैं।
तो क्या कहते हो आरुष को कोटा भेज दूँ, या प्रयाग ???



                                      

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