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गुरुवार, 29 दिसंबर 2016

आंदोलन

आंदोलन वो है जो सबसे पहले मन में चले,
और उस विचार को सबसे पहले,
मन को आंदोलित करना चाहिए। 
फिर उसे जज्बात से लबरेज़ हो कर,
भाषण और जागरण के रूप में,
एक पूर्ण रूप आंदोलन में ढलना चाहिए।
जो विचार केवल दिमाग में आये,
और दिल और मन में ढल पाए,
बाण वही सही जो सीधा दिल में उतर जाये,
अगर विचार बाण आपके ही मन को न भेद पाए,
तो उस बाण का धनुष पर संधान नहीं करना चाहिए। 
और अगर मन में कोई आंदोलन चल रहा है,
कोई अथक अनवरत जागरण चल रहा है,
कोई बाण है जो ह्रदय में चुभता जा रहा है,
तो उस बाण का तरकश में रहना अपमान है,
अपने हुनर के धनु पर उसका संधान करना चाहिए,
और भेद जाए सारे लक्ष्य एक ही बार में,
कुछ इस तरह से उसे लक्ष्य पर चला देना चाइये,
ऐसे विचारों को अटल अतुल आंदोलन में ढलना चाहिए।
क्योंकि,
आंदोलन वो है जो सबसे पहले मन में चले,
और उस विचार को सबसे पहले,
मन को आंदोलित करना चाहिए। 
फिर उसे जज्बात से लबरेज़ हो कर,
भाषण और जागरण के रूप में,
एक पूर्ण रूप आंदोलन में ढलना चाहिए। - अतुल सती 'अक्स'

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